आखिर हमारे देश को हो क्या गया है कहाँ गई है इन लोगो की इंसानियत |
अगर यही राम राज्य है तो इस राम राज्य को तो खुद राम जी भी पसंद नहीं करेंगे , क्या पब्लिक को समझ नहीं आता के ये सिर्फ हमें लड़ने की साजिश है , इनका हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नहीं है |
आइये जानते है अब नया मोड़ सामने आया है , राजसमन्द हत्याकांड मैं एक हत्यारे आतंकवादी को बचने की कोशिश की जा रही है और ये कोशिश कोई और नहीं कर रहा है |
ये वही लोग है जो दिन रात हिंदुत्वा का ढोल पीटते रहते है ,जबकि सभी अची तरह जानते है के इनका हिंदुत्वा से कुछ लेना देना नहीं है इनको सिर्फ अपनी पॉलिटिक्स की रोटी सेकनी है भैय्यो अबतो समझ जाओ ,
बीते दिनों राजस्थान में हुए राजसमन्द हत्याकांड में बड़ा खुलासा किया है. यह खुलासा पीपल्स यूनियन ऑफ़ सिविल लिबर्टीज, मजदूर किसान शक्ति संगठन और अमन बिरादरी की तरफ से किया गया है.
दरअसल इनकी तरफ से एक टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और इस दौरान जो बात सामने आई है, उसे जानकार आप हैरान हो जाएंग.
अब भी आचे लोग जिंदा है इस दुनिया मैं और इंसाफ पसंद लोग भी सायद इसलिए आज भी ज़ुल्म के खिलाफ लोग आवाज़ उठाते है
मार्बल का टुटा हुआ स्लेब, पुलिस जाँचकारों के ज़रिए इस्तेमाल के बाद फेंके गए सर्जिकल गलोवज़ और खोजी कुत्ते, यह राजस्थान में राजसमन्द जिला के राजनगर क्षेत्र में उस जगह का दृश्य है.
इस दौरे में जो बात निकलर सामने आई है वो बहुत ही चोंकाने वाली है जिसको सुनकर आपका इंसानियत से विश्वास उठ जायेगा , उसके मुताबिक़, घटनास्थल पुलिस स्टेशन और कलक्टर के कार्यालय से एक किलोमीटर से भी कम की दूरी पर है.
बताया यह भी जा रहा है कि पुलिस ने सुबूतों की सुरक्षा के लिए उस क्षेत्र की न तो घेराबंदी की और न ही उसे सील किया.
वहीँ पुलिस की इस हरकत से सबूत भी बर्बाद हो गए. कहा जा रहा है कि पुलिस ने ऐसा दरअसल जानबूझकर किया है.
जांचकर्ताओं ने बताया कि हमें उस जगह जहाँ अफराजुल इस्लाम को जिंदा जलाया गया था, कुछ आवारा कुत्ते नज़र आए जो आग की वजह से से काले पड़ चुके पत्थरों को सूंघते फिर रहे थे.
हमारी रूह कांप गई और पेट की हालत अजीब से होने लगी. हमें कुछ करने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई और हमने पौधों के कुछ फूल इकट्ठे किए और उस जगह रख दिए जहां वह शख्स जिसकी हत्या की गई थी.
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